ख़ास ख़बर | 11.03.2010
अहमदीनेजाद ने रॉबर्ट गेट्स को आड़े हाथ लिया
गेट्स अपना तीन दिन का अफ़ग़ानिस्तान दौरा ख़त्म कर ही रहे थे जब अहमदीनेजाद भी क़ाबुल पहुंच गए. ईरान और अमेरिका के बीच फंसे अफ़ग़ानी राष्ट्रपति हामिद करज़ई की परेशानी बढ़ाते हुए अहमदीनेजाद ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अमेरिका और पश्चिमी देश अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध के ज़रिए आतंकवाद को कभी ख़त्म नहीं कर सकते.
अहमदीनेजाद ने साफ साफ कहा, "ऐसा क्यों है कि जो लोग आतंकवाद से लड़ने का दावा करते हैं वो कभी सफल नहीं होते. मुझे लगता है कि यही लोग एक दोहरा खेल खेल रहे हैं." अहमदीनेजाद ने कहा कि यही लोग आतंकवादियों को रास्ता दिखाते हैं और फिर कहते हैं कि इनसे लड़ना है. गेट्स को संबोधित करते हुए अहमदीनेजाद ने कहा,"आप इस इलाक़े में क्या कर रहे हैं. आपका देश अफ़गानिस्तान से क़रीब 10,000 किलोमीटर दूर है. आप यहां क्या कर रहे हैं."
अफ़ग़ान राष्ट्रपति करज़ई ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान अपने पड़ोसियों के खिलाफ अपनी ज़मीन का इस्तेमाल कभी नहीं होने देगा लेकिन यह बात साफ़ है कि वे दोनों पक्षों के बीच बयानबाज़ी में फंस गए हैं. इससे पहले रॉबर्ट गेट्स ने कहा था कि ईरान अमेरिका के प्रभाव को कम करना चाहता है और उन्होंने यह बात करज़ई तक पहुंचा दी है. " मैंने करज़ई से कह दिया है कि हम चाहते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान अपने पड़ोसियों से अच्छे संबंध रखे. लेकिन हम यह भी चाहते हैं कि अफ़ग़ान सरकार के साथ उसके पड़ोसी खेल न खेलें."
उधर अमेरिका के मैसेचूसेट्स से ब्रिटेन के विदेश मंत्री डेविड मिलिबैंड भी गेट्स का पक्ष लेने और ईरान की आलोचना करने से पीछे नहीं हटे. उन्होंने मैसेचूसेट्स में कहा कि अहमदीनेजाद का बयान 'लंबी चौड़ी बातचीत और बेकार का दिखावा' है. ईरान को समझना चाहिए कि अपने निवेशों को बचाने के लिए उसे शिया अफ़ग़ानों की मदद करनी चाहिए और शांति को बढ़ावा देना चाहिए.
अमेरिका का मानना है कि ईरान अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवादियों की मदद कर रहा है, हालांकि अमेरिका ने कहा है कि इराक़ में ईरान अफ़ग़ानिस्तान से कहीं ज़्यादा आतंकवादियों को मदद देता है.
रिपोर्टः रॉयटर्स/ एम गोपालकृष्णन
संपादनः एस गौड़

























