ख़ास ख़बर | 04.07.2009
बान को सूची से मिलने की इजाज़त नहीं
बर्मा के सैन्य शासन के प्रमुख जनरल थान श्वे से संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने शनिवार को दोबारा मुलाक़ात की उन्होंने विपक्षी नेता आउंग सान सूची से मिलने का अनुरोध किया गया था लेकिन जनरल श्वे ने मुलाक़ात की इजाज़त नहीं दी.
बान की मून ने पत्रकारों को बताया कि वे बहुत दुखी हैं और ये अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिये एक बड़ा झटका है जो कि बर्मा को सहायता का हाथ देना चाहता था. "मैं आउंग सान सूची से मिलना चाहता था. मुझे उम्मीद थी कि वो मेरे अनुरोध को पूरा करेंगे लेकिन ये बहुत दुख की बात है कि उन्होंने मुझे सू ची से नहीं मिलने दिया. मैं बहुत निराश हूं".
बातचीत में बान की मून ने सभी राजनैतिक क़ैदियों की रिहाई पर ज़ोर दिया. "मैंने बर्मा में सभी राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिये उन पर दबाव डाला, और सूची की रिहाई पर भी. साथ ही ज़ोर दिया कि सरकार और विपक्ष में उच्च स्तरीय बातचीत हो जिसमें सूची भी शामिल हों. चुनाव निष्पक्ष हों और बर्मा के लोगों को निर्णय लेने की स्वतंत्रता हो".
बर्मा में 2,000 राजनैतिक क़ैदी हैं जिनकी चुनाव से पहले रिहाई की मांग बान ने की. बान की मून का रंगून में पांच सौ अधिकारियों, राजनेयिकों को संबोधित करने का भी कार्यक्रम है. बर्मा और दक्षिण एशिया के एक अख़बार द इररॉडी ने लिखा है कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव विपक्षी पार्टी नेशनल लीगा फॉर डेमोक्रेसी के पांच सदस्यों से भी मिलने वाले हैं.
विपक्ष की नेता आंग सान सू ची तेरह साल से नज़रबंद हैं. फ़िलहाल नज़रबंदी के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में उन्हें रंगून की इनसेन जेल में रखा गया है. उन पर मुकदमा भी जारी है जिसे शुक्रवार को 10 जुलाई तक के लिये मुल्तवी कर दिया गया. अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि सेना उन्हें अगले साल होने वाले चुनावों से दूर रखना चाहती है.
रिपोर्ट-एजेंसियां आभा मोंढे
संपादन-एस गौड़






















